➤ हिमाचल हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मामले में सोलेशियम राशि पर ब्याज देने का अधिकार माना
➤ टेक राम की याचिका स्वीकार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
➤ केंद्र सरकार और अन्य उत्तरदाताओं को आठ सप्ताह के भीतर ब्याज सहित बढ़ी मुआवजा राशि जमा करने का आदेश
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे के अतिरिक्त भुगतान की जाने वाली सोलेशियम राशि पर भी ब्याज पाने का अधिकार है। अदालत ने केंद्र सरकार और अन्य उत्तरदाताओं को निर्देश दिए हैं कि वे ब्याज सहित बढ़ी हुई मुआवजा राशि आठ सप्ताह के भीतर अदालत की रजिस्ट्री में जमा करवाएं। इस फैसले में अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सोलेशियम पर ब्याज देने का कानूनी मुद्दा अब विवादित नहीं रह गया है।
टेक राम की याचिका पर आया फैसला
यह फैसला न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने टेक राम की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए सुनाया। मामले में अदालत के सामने मुख्य प्रश्न यह था कि क्या भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत प्रभावित जमीन मालिक सोलेशियम की राशि पर भी ब्याज पाने का हकदार है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित कानूनी प्रावधानों और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों पर विचार किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता सोलेशियम की राशि पर ब्याज पाने का हकदार है।
क्या होती है सोलेशियम राशि?
भूमि अधिग्रहण के मामलों में सोलेशियम वह अतिरिक्त राशि होती है, जो कानून के तहत जमीन के अनिवार्य अधिग्रहण के बदले मुआवजे के अतिरिक्त दी जाती है। जब सरकार किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किसी व्यक्ति की जमीन का अधिग्रहण करती है, तो प्रभावित जमीन मालिक को निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाता है। इसके अतिरिक्त सोलेशियम की राशि भी देय हो सकती है।
इस फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने सोलेशियम की राशि पर भी ब्याज के अधिकार को स्वीकार किया है। यानी मामले में केवल मूल मुआवजे और अतिरिक्त राशि तक ही बात सीमित नहीं रही, बल्कि अतिरिक्त राशि पर देय ब्याज के सवाल पर भी अदालत ने अपना रुख स्पष्ट किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के सुंदर सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का उल्लेख किया। अदालत ने इस फैसले के आधार पर दोहराया कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में सोलेशियम की राशि पर भी ब्याज देय है।
अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर कानूनी स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। इसी आधार पर याचिकाकर्ता के पक्ष को स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों और उत्तरदाताओं को आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
आठ सप्ताह के भीतर राशि जमा करवाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य उत्तरदाताओं को आदेश दिया है कि वे ब्याज सहित बढ़ी हुई मुआवजा राशि आठ सप्ताह के भीतर अदालत की रजिस्ट्री में जमा करवाएं। इस निर्देश के साथ अदालत ने याचिकाकर्ता को सोलेशियम पर ब्याज पाने का अधिकार स्वीकार किया है।
यह फैसला भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें अतिरिक्त मुआवजा राशि पर ब्याज के कानूनी अधिकार को दोहराया गया है। हालांकि, प्रत्येक मामले में मिलने वाली राशि और ब्याज की गणना संबंधित अधिग्रहण, लागू कानूनी प्रावधानों तथा अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी।



